# SCO Summit 2026: मोदी, जिनपिंग और पुतिन एक मंच पर, वैश्विक राजनीति पर टिकी दुनिया की नजर
**बिश्केक, 31 अगस्त 2026:** किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन (SCO) का 2026 शिखर सम्मेलन शुरू हो गया है। इस सम्मेलन में भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन समेत कई प्रमुख देशों के नेता हिस्सा ले रहे हैं। दो दिवसीय सम्मेलन में क्षेत्रीय सुरक्षा, आर्थिक सहयोग और बदलती वैश्विक व्यवस्था जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हो रही है।
इस सम्मेलन को भारत, चीन और रूस के बीच कूटनीतिक संबंधों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन से पहले शी जिनपिंग और व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय मुलाकात हुई, जिसमें दोनों नेताओं ने चीन-रूस संबंधों को और मजबूत करने पर जोर दिया।
### भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है SCO Summit?
भारत के लिए SCO एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बैठकों में रूस के साथ रणनीतिक और आर्थिक संबंध, यूक्रेन युद्ध, ऊर्जा सुरक्षा तथा क्षेत्रीय स्थिरता जैसे मुद्दे अहम रहने की उम्मीद है। मोदी और पुतिन की द्विपक्षीय बातचीत में प्रधानमंत्री ने युद्ध को समाप्त करने और शांति की दिशा में आगे बढ़ने की आवश्यकता पर जोर दिया।
वहीं, मोदी और शी जिनपिंग की संभावित बातचीत पर भी अंतरराष्ट्रीय नजर बनी हुई है। भारत और चीन के बीच हाल के महीनों में कूटनीतिक संपर्क बढ़ने के कारण दोनों नेताओं की मुलाकात को विशेष महत्व दिया जा रहा है।
### अमेरिका के लिए भी अहम संदेश
SCO में चीन, रूस, भारत और ईरान जैसे देशों की मौजूदगी इसे पश्चिमी नेतृत्व वाली वैश्विक व्यवस्था के समानांतर एक महत्वपूर्ण मंच बनाती है। हालांकि संगठन के सदस्य देशों के हित पूरी तरह समान नहीं हैं, फिर भी सम्मेलन बदलती वैश्विक शक्ति-समीकरणों का संकेत दे रहा है।
विशेषज्ञों की नजर इस बात पर भी है कि बिश्केक में मोदी, जिनपिंग और पुतिन की मौजूदगी वैश्विक कूटनीति में किस तरह का संदेश देती है। आने वाले दिनों में SCO की बैठकों और द्विपक्षीय वार्ताओं से भारत की विदेश नीति तथा क्षेत्रीय राजनीति को लेकर कई महत्वपूर्ण संकेत मिलने की संभावना है।